हरियाणा सरकार के तत्वावधान में 11वां मेगा सब्जी एक्सपो-2025, दिनांक 21, 22, 23 मार्च को आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों, उद्यमियों और अनुसंधानकर्ताओं को सब्जी उत्पादन, मधुमक्खी पालन और आलू प्रौद्योगिकी से जुड़ी नवीनतम तकनीकों और नवाचारों से अवगत कराना है।

प्रमुख केंद्र और उनकी विशेषताएं


1. सब्जी उत्कृष्टता केंद्र, घरौंड़ा (करनाल)


यह केंद्र आधुनिक सब्जी उत्पादन तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। यहां निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध हैं:

हाइड्रोपोनिक ग्रीन यूनिट – बिना मिट्टी के पौधों की खेती

लेजर आधारित भूमि सिंचाई – जल संरक्षण के उन्नत उपाय

पोली हाउस में खेती एवं ड्रिप सिंचाई – नियंत्रित वातावरण में उत्पादन

बीजिंग (स्वचालित ट्रांसप्लांट नेट) – उच्च गुणवत्ता वाले पौध रोपण

संपूर्ण केंद्र पर स्वचलित सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली – जल बचत और उत्पादन वृद्धि

सब्जियों के हाइब्रिड बीज – अधिक पैदावार और रोग प्रतिरोधक क्षमता

नए उन्नत किस्मों की खेती – उच्च गुणवत्ता और बाजार मांग के अनुरूप उत्पादन

लो-टनल तकनीक – छोटे और सीमांत किसानों के लिए नवाचार

मल्चिंग एवं विभिन्न खेती के प्रयोग – भूमि की उर्वरता बनाए रखने के उपाय

सब्जी उत्पादन वालों को प्रशिक्षण – आधुनिक तकनीकों पर विशेष कार्यशालाएं

सब्जी मंडियों में उचित मूल्य प्रणाली – किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने की पहल


2. एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र, रामनगर, कुरुक्षेत्र


मधुमक्खी पालन को एक व्यावसायिक रूप देने के लिए यह केंद्र कई उन्नत सुविधाओं से सुसज्जित है:

स्वचालित शहद प्रसंस्करण इकाई – उच्च गुणवत्ता वाले शहद का उत्पादन

स्वचालित शहद बोतल भरने की इकाई – व्यापार के लिए तैयार उत्पाद

स्वचालित वैक्स फाउंडेशन इकाई – मोम उत्पादों का निर्माण

मधुमक्खी छत्ते निर्माण इकाई – टिकाऊ और उन्नत छत्ते तैयार करना

मधुमक्खी बॉक्स निर्माण इकाई – आधुनिक मधुमक्खी पालन बॉक्स

शहद गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला – विश्व स्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था

हनी पार्क – शहद और मधुमक्खी पालन से जुड़े नवाचारों का प्रदर्शन

शहद व्यापार केंद्र – किसानों और व्यापारियों के लिए सीधा बाजार

मधुमक्खी पालन के माध्यम से परागण में बढ़ोतरी – कृषि उत्पादन में सुधार

मधुमक्खी से जुड़े उद्योगों का संग्रह – शहद, वैक्स और अन्य उत्पादों से संबंधित जानकारी


3. आलू प्रौद्योगिकी केंद्र, शामगढ़, करनाल


आलू उत्पादन और भंडारण को प्रभावी बनाने के लिए यह केंद्र निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान करता है:

एयरोपोनिक मिनी ट्यूबर उत्पादन – बिना मिट्टी के आलू उत्पादन

टिशू कल्चर आधारित बीज आलू उत्पादन – रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले बीज

कोल्ड स्टोरेज – आलू संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक

शुद्ध बीज मिनी ट्यूबर उत्पादन – प्रमाणित और उच्च उत्पादकता वाले बीज

नेट हाउस मिनीट्यूबर उत्पादन – नियंत्रित वातावरण में खेती

पॉलीहाउस लेट्स कटिंग – आलू की नई उन्नत किस्मों पर अनुसंधान


क्यों भाग लें इस मेगा एक्सपो में?

नवीनतम कृषि तकनीकों की जानकारी – हाइड्रोपोनिक, ड्रिप सिंचाई, लो-टनल तकनीक

मधुमक्खी पालन को एक सफल व्यवसाय बनाने का मौका – शहद उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, व्यापार नेटवर्क

आलू उत्पादन और भंडारण के नवीनतम तरीके – एयरोपोनिक और टिशू कल्चर तकनीक

प्रत्यक्ष प्रशिक्षण और प्रदर्शन – खेती, मधुमक्खी पालन और भंडारण से जुड़ी कार्यशालाएं

बाजार और व्यापार के नए अवसर – उत्पादों को सीधे बाजार से जोड़ने की सुविधा


आयोजित स्थान:


📍 घरौंड़ा (करनाल) हरियाणा


यदि आप आधुनिक कृषि, मधुमक्खी पालन और सब्जी उत्पादन से जुड़ी नवीनतम तकनीकों और व्यापारिक संभावनाओं के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो इस एक्सपो में भाग लेना आपके लिए अत्यंत लाभदायक होगा।


अधिक जानकारी और अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट ibdcramnangar@gmail.com पर विजिट करें।





Related Post

  • Cotton Crop for Bee Keeping

    मधुमक्खी पालन में उपयोगी है कपास की फसल   कपास की फसल में पोलन व नेक्टर दोनों की पर्याप्त मात्रा मिलती है कपास की फसल की बुआई मई के महीने में की जाती है। जिन मधुमक्खी पालकों के नजदीक कपास की खेती होती है वहां वे साथी मधुमक्खियों को रख सकते हैं। भारतीय मानचित्र में दिखाया गया है कहाँ कहाँ इसकी फसल उगाई जाती है।     जो साथी भी शहद का उत्त्पादन अधिक मात्रा में लेना चाहें उनके लिए अच्छा चुनाव है परन्तु केमिकल के छिड़काव से मधुमक्खियों को बचा कर रखने की भी आवश्यकता होती है। आजकल सभी प्रकार की फसलों में दवाइयों का छिड़काव किया जाता है जो मधुमक्खियों के लिए खतरनाक है। इससे आपकी मधुमक्खियों के मरने की अधिक संभावना होती है…

  • |

    वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन

    वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन मधुमक्खियों के प्रबंधन और देखभाल की एक ऐसी विधि है जो आधुनिक विज्ञान, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी पर आधारित है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करके मधुमक्खियों की उत्पादकता को बढ़ाना और उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। इसमें पारंपरिक मधुमक्खी पालन से अलग आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जैसे: • मधुमक्खी के प्रकार का चयन: स्थानीय और उन्नत प्रजातियों का चुनाव ताकि बेहतर शहद उत्पादन और रोग प्रतिरोधक क्षमता सुनिश्चित हो। • हाइव मैनेजमेंट: आधुनिक लकड़ी के बॉक्स (Langstroth हाइव) का उपयोग किया जाता है, जो मधुमक्खियों को बेहतर सुरक्षा और आराम देता है। • रोग और कीट प्रबंधन: वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खियों में होने वाले रोगों (जैसे वरुआ माइट) और कीटों का प्रबंधन। • फूलों और पौधों…

  • Bee’s & Flower’s

    There are many types of flower’s in the nature for bee’s. Bee Keeper’s don’t know much about which types of flower’s were used by the bee’s to collect nectar & pollen. We only know little about the flower’s name & variety. In the forest bee’s goes for their food and visiting more then 2,000 flower’s a day in search of nectar & pollen. If we identify some flower’s to useful for them it will be very helpful for bee keeper’s. Bee keeper’s  migrate the bee’s from one place to another place to survival of bee’s and to collect bee products. Recognition of the site and requirements of the bee’s are useful for bee keeper’s. In the video given bellow you can understand about how to…

  • मधुमक्खी पालन कम समय में अधिक लाभ

    मधुमक्खी पालन के काम की बहुत सी खूबियां होती हैं जिन्हे जानना आवश्यक होता है । इस काम में आपको हमेशा उनके पीछे लगे रहने की जरुरत नहीं रहती, ऐसा और जीवो के साथ हो सकता है कि आपको उनका ध्यान २४ घंटे रखना पड़ता हो पर मधुमक्खी पालन में आपको हर दिन देखना जरुरी नहीं होता अगर आप ७ दिन में एक बार या जब शहद हार्वेस्टिंग का टाइम होता है तब भी विजिट करते हो तब भी कोई प्रॉब्लम नहीं होती । आप को हार्वेस्टिंग टाइम या फीडिंग के समय ज्यादा ध्यान रखना होता है सर्दियों में भी आप सब का काम समय लगता है और आप को केवल देखभाल करनी होती है । थोड़ा समय दे कर आप चाहें तो इसे पार्ट…

  • Online Beekeeping Training in India – Learn Beekeeping from Experts (March 23, 2025)

    Join Our Exclusive Online Beekeeping Training on March 23, 2025 Are you passionate about beekeeping or looking to start your journey as a beekeeper? Join our Online Beekeeping Training on March 23, 2025, and learn everything you need to know to get started! Training Details: 🌼 Date: Sunday, 23rd March 2025 🌼 Time: 9:30 AM to 4:30 PM (IST) 🌼 Mode: Online (Google Meet) 🌼 Training Fee: ₹499 This training is designed for beginners and experienced beekeepers who want to deepen their knowledge and improve their beekeeping skills. 🐝 What You Will Learn: 🐝 Fundamentals of beekeeping 🐝 How to set up and manage a beehive 🐝 Understanding bee behavior and colony management 🐝 Harvesting honey and maintaining hive health 🐝 Common challenges and how to overcome…

  • How many days to make honey in Honeycomb?

    Knowing when to harvest Honey can be extracted when it has been capped over by the bees on the comb. At this stage, the honey will have been ‘matured’ by the bees, sealed up and is ready to eat. Often, when you want to remove the honey, not all will have been sealed. I always use a rule of thumb here if three quarters of the honey is sealed, I am happy to remove it from the hive. This is an important point. If you extract honey that has not been sealed, the water content will inevitably be too high, and the honey will ferment in storage and explode if sealed in a jar or tank. It will also taste foul if this happens. You…

Leave a Reply